Sunday, March 18, 2007

हाथ में होती है किस्मत ?


कहते हैं किस्मत हाथ में होती है। लेकिन सच तो ये भी है कि जिनके हाथ नहीं होते उनकी भी किस्मत होती है। फिर भी कल के बारे में जानने की जिज्ञासा सभी में होती है। उनमें भी जो किस्मत से ज्यादा कर्म पर यकीन करते हैं। होना भी यही चाहिए। बिना कर्म के किस्मत भी साथ नहीं देती।
मेरे एक मित्र को ये बातें बकवास लगती हैं। कहते हैं सब मनगढंत कहानियां है जिसे अपने मतलब के लिए हजारों साल पहले कुछ लोगों ने गढ़ी थी। पिछले दिनों उनका फोन आया कहा बहुत परेशान हैं। दफ्तर में बॉस से खटपट हो गई है। मैने कहां मेहनत से काम करो बात बन जाएगी। इससे पहले की मेरी बात पर अमल करते बर्खास्त हो गए। सरकारी नौकरी ऊपर से दिल्ली पुलिस की।
मुझे मालूम था ज्योतिष पर उनका यकीन नहीं फिर भी मजाक में कहा- किसी ज्योतिषी से राय क्यों नहीं लेते । वे नाराज तो नहीं हुए बल्कि धीरे से बोले यार जा चुका हूं। एक अंगूठी भी पहनी फिर भी सब कूड़ा हो गया। मैने तपाक से पूछा तो उसे उतारा या नहीं । जवाब था - यार कही और गड़बड़ न हो जाए। ऐसे लोग हम सभी के आस पास है । शायद हम खुद भी। जब बात बन जाती है तो कर्म का दंभ भरते हैं। बिगड़े ही सहारा खोजने लगते हैं। मेरे कहने का मतलब सिर्फ यही है कि अगर रत्न पहनते भी हैं तो इतनी जानकारी तो रखिए ही कि किस राशि को कौन सा रत्न पहनना चाहिए। लेकिन ये भी ध्यान रखाना चाहिए कि सिर्फ राशि के आधार पर पहने से पूरा फायदा नहीं होगा। जब तक कि ग्रहों की दशा और स्थान भी उसके अनुकूल न हो। वैसे मेरा व्यक्तिगत अनुभव यही रहा है कि जब बुरा वक्त होता है तो किसी रत्न से उसे नहीं टाला जा सकता। समझदारी इसी में है कि कुछ वक्त तक सही रास्ते पर संभल कर चलने की आदत डाल ली जाए।

3 comments:

Anonymous said...

My astrological background informs me that a description of a person involves many layers of information. In Western astrology, there is no single sign or planet that totally describes a person. It is in the blending of symbols that any kind of interpretation of a life is possible. But the symbols are constants. Aries is always Aries and Saturn is always Saturn. Astrologers are trained to both separate and blend astrological influences. For over 4,000 years, these foundations of Western astrology have been reconfirmed by succeeding generations of astrologers. Bruce/uk

Anonymous said...

My astrological background informs me that a description of a person involves many layers of information. In Western astrology, there is no single sign or planet that totally describes a person. It is in the blending of symbols that any kind of interpretation of a life is possible. But the symbols are constants. Aries is always Aries and Saturn is always Saturn. Astrologers are trained to both separate and blend astrological influences. For over 4,000 years, these foundations of Western astrology have been reconfirmed by succeeding generations of astrologers. Bruce/uk

Anonymous said...

have no doubts that the world I live in is deep, complex, and mysterious. The fact that astrology exists at all is amazing to me. It suggests to me that humans and other life forms have actually internalized the sky in a strange way. But I find that it is in "pattern perception" that astrology becomes alive. Pattern perception is something that comes easy for some, harder for others, but is developable. This consensus intuitive "knowing" is how Western astrology has been kept alive throughout a sustained assault on it from the scientific community during the past 300 years. richa_palk@mru.co